शारदीय नवरात्रि 26 से शुरू: शहर में सजे माता के दरबार, प्रातः काल कलश स्थापन मुहूर्त सुबह 4:48 से लेकर 7:48 तक


फरीदाबादएक घंटा पहले

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सभी तैयारियां पूरी, शहरवासी सुबह से शाम तक कर सकेंगे पूजा अर्चना, इस बार अलग अलग हिस्सों से आएंगे कलाकर, करेंगे माता की चौकी।

दो साल के कोराना काल में तमाम प्रतिबंधों के साथ लोगों ने त्यौहार मनाए हैं। वैक्सीनेशन अभियान पूरा होने आैर कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद लोगों में त्यौहारी सीजन मनाने का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। सोमवार 26 सितंबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो रहा है। इसे लेकर शहर के मंदिरों में माता के दरबार सज चुके हैं।

सुबह कलश स्थापना के साथ शहरवासी पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना करेंगे। इसके लिए सभी मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई है। शहर का प्रमुख देवी मंदिर एनआईटी दो तिकोना पार्क स्थित श्री महारानी वैष्णों देवी मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। करीब 58 साल पुराना यह मंदिर शहर का प्रमुख देवी मंदिर है। सबसे अधिक श्रद्धांलु यहां आकर पूजा अर्चना करते हैं। इसके अलावा एनआईटी बस अड्‌डा स्थित काली देवी मंदिर, रेलवे रोड स्थित बांके विहारी मंदिर, एनआईटी एक मार्केट स्थित हनुमान मंदिर, बी ब्लाॅक स्थित हनुमान मंदिर, एनआईटी दो शिवाला मंदिर, ओल्ड फरीदाबाद स्थित पथवारी मंदिर आदि को नवरात्रि की तैयारियां पूरी कर ली गई है। सुबह कलश स्थापना के साथ ही पूजा अर्चना शुरू हो जाएगी।

वैष्णों देवी माता मंदिर की ये है कहानी

श्री महारानी वैष्णव देवी मंदिर संस्थाान के प्रधान जगदीश भाटिया ने बताया कि शहर के इस प्रमुख मंदिर का निर्माण करीब 58 साल पहले किया गया था। पहले तिकोना पार्क के पास खाली मैदान थाा। यहां एक कुंआ था। एक दिन उस कुंए में करीब पांच साल का बच्चा गिर गया था। उसे करीब पांच छह घंटे बाद जिंदा निकाला गया। उन्होंने बताया कि बच्चा जब बाहर आया तो उसके हाथ में लाल रंग का कपड़ा था। पूर्वजों ने उसे दैवीय कृपा मानते हुए उसी स्थान पर महारानी देवी की तस्वीर रखकर पूजा अर्चना शुरू कर दी। धीरे धीरे यहां मंदिर का निर्माण कराया गया। यह मंदिर शक्तिपीठ के रूप में माना जाता है। क्योंकि यहां स्थापित की गई देवी की प्राण प्रतिष्ठा कराई गई थी।

इस बार मिलेगा ब्रत का प्रसाद

भाटिया ने बताया कि इस बार यहां आने वाले भक्तों को प्रसाद के तौर पर ब्रत का प्रसाद वितरित किया जाएगा। इसके अलावा रात में अलग अलग स्थानों से आने वाले कलाकारों द्वारा माता की रात आठ से दस बजे तक चौकी की जाएगी। इसके अलावा प्रतिदिन आरती शाम सात बजे से, माता की परिक्रमा रात दस बजे आैर कन्या पूजन रात्रि नौ बजे की जाएगी। उन्होंने बताया कि दो साल बाद कोरोना से मिली मुक्ति से बाद मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए कोई बंदिशें नहीं होगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 4:48 से 7:48 तक

प्राचीन शिव मंदिर राजीव कॉलोनी के आचार्य सर्वेश पांडेय

प्राचीन शिव मंदिर राजीव कॉलोनी के आचार्य सर्वेश पांडेय

प्राचीन शिव मंदिर राजीव कॉलोनी के आचार्य सर्वेश पांडेय ने बताया कि शारदीय नवरात्र का मुहूर्त सोमवार 26 सितंबर 2022 से लेकर 4 अक्टूबर तक चलेगा। ऐसे में सभी श्रद्धालु प्रातः काल सुबह 4:48 से लेकर 7:48 तक कलश स्थापना कर सकते हैं। इसके बाद भी दूसरा मुहूर्त 9:18 से लेकर 10:48 तक तथा तीसरा मुहूर्त दोपहर अभिजीत मुहूर्त में भी कलश की स्थापना कर सकते हैं। उन्हाेंने बताया कि विशेष मुहूर्त में किया हुआ पूजा विशेष लाभ देता है। मां भगवती की प्रथम दिवस शैलपुत्री मां के स्वरूप में पूजन करें, दुर्गा सप्तशती का यथाशक्ति पाठ करें। यदि यह संभव न हो तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और क्षमा प्रार्थना जरूर करें। मां भगवती की प्रसन्नता से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

पूजा का ये है विधि विधान

आचार्य ने बताया कि मां भगवती की कृपा प्राप्त करने के लि ए पूजा का विशेष विधि, सबसे पहले कलश के नीचे मिट्टी डालकर जवारा उगाएं। उसके बाद एक अलग प्लेट में सुपारी पर गणेश जी और गाय के गोबर पर गौरी मां का पूजन करें। कलश की पूजा की जो विधि है, सबसे पहले कलश में अक्षत दूर्वा एक सिक्का हल्दी डालकर आम का पल्लव लगाएं। ऊपर से नारियल चुन्नी लपेट कर रखें। उसके बाद पूजन करें। सबसे पहले पूजन में जल चढ़ाएं, पंचामृत से स्नान कराएं, शुद्ध जल से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं, चंदन टीका लगाएं, अक्षत पुष्प चढ़ाएं, धूप दीप भोग लगाने का प्रसाद फल पान का पत्ता चढ़ाकर दक्षिणा चढ़ाएं।अक्षत पुष्प लेकर प्रणाम और प्रार्थना करें। इस विधि से किया हुआ पूजा विशेष लाभ देगा।

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