AAP ने वन नेशन वन इलेक्शन का किया विरोध: केंद्र के प्रस्ताव को बताया गैर संवैधानिक, कहा- ये लोकतंत्र के लिए खतरा


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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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आम आदमी पार्टी (AAP) ने केंद्र सरकार के वन नेशन, वन इलेक्शन के प्रस्ताव का विरोध जताया है। पार्टी ने इसे गैर संवैधानिक और भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। AAP नेता आतिशी ने प्रस्ताव का पुरजोर विरोध करते हुए लॉ कमीशन को 12 पेज में अपनी राय रखी है।

बता दें कि भाजपा ने पहली बार 2017 में वन नेशन, वन इलेक्शन का प्रस्ताव देश के सामने रखा था। इस प्रस्ताव को लॉ कमीशन के सामने रखा गया और 2018 में लॉ कमीशन ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। दिसंबर 2022 में लॉ कमीशन ने सभी राजनीतिक दलों को अपनी रिपोर्ट भेजकर इस पर उनकी राय मांगी थी।

भाजपा के ऑपरेशन लोटस को फायदा मिलेगा
आतिशी ने कहा- लॉ कमीशन ने सभी राजनीतिक दलों से राय मांगी थी। सबको लगता था कि वन नेशन, वन इलेक्शन को लागू करने में क्या दिक्कत है। लेकिन जब हमने इस प्रस्ताव की गहराई से जांच की तो इसमें कई सारे चिंताजनक फैक्ट्स और थ्योरिटिकल इश्यूज सामने आए। अगर भारत में वन नेशन वन इलेक्शन हो जाए तो इससे हमारे लोकतंत्र को तगड़ा झटका लगेगा।

इसलिए हमारी पार्टी इस प्रस्ताव का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर वन नेशन वन इलेक्शन लागू हुआ तो लोगों का मैंडेट देने का अधिकार खत्म होने का खतरा है और इससे भाजपा के ऑपरेशन लोटस को फायदा मिलेगा।

बड़ी पार्टियां छोटी पार्टियों को दबा देंगी- आतिशी
AAP नेता आतिशी सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्र और राज्य के एक साथ चुनाव और प्रचार के दौरान अलग-अलग मुद्दों पर अपनी बात रखना मुश्किल होगा। साथ ही जो लोग केंद्र में अलग और राज्य में अलग पार्टी को वोट देतें हैं उनके लिए भी मुश्किल होगा कि वो किसे वोट दें। आतिशी ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन लागू होने से जो बड़ी पार्टियां हैं, जिनके पास पैसा और ताकत है, वो क्षेत्रिय पार्टी को दबा देंगी। इससे राज्यों की जनता ये डिसिजन नहीं ले पाएगी कि वोट किसे देना है।

AAP ने पूछा- ये प्रस्ताव लाया क्यों जा रहा है?
AAP नेता ने पूछा कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव को क्यों ला रही है। आतिशी ने कहा- नो कॉन्फिडेंस तभी माना जाएगा कि जब तक नई सरकार का गठन होगा। मान लीजिए किसी को बहुमत नहीं मिलता है तो फिर जिस तरह स्पीकर का चुनाव होता है। किसी भी विधायक और सांसद पर एन्टी डिफेक्शन लॉ लागू नहीं होगा और वो किसी के लिए भी वोट कर सकता है। ये बहुत खतरनाक है।

समझिए क्या है वन नेशन-वन इलेक्शन?
वन नेशन-वन इलेक्शन या एक देश-एक चुनाव का मतलब हुआ कि पूरे देश में एक साथ ही लोकसभा और विधानसभा के चुनाव हों। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही होते थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।

क्या वाकई इसकी जरूरत है?
दिसंबर 2015 में लॉ कमीशन ने वन नेशन-वन इलेक्शन पर एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें बताया था कि अगर देश में एक साथ ही लोकसभा और विधानसभा के चुनाव कराए जाते हैं, तो इससे करोड़ों रुपए बचाए जा सकते हैं। इसके साथ ही बार-बार चुनाव आचार संहिता न लगने की वजह से डेवलपमेंट वर्क पर भी असर नहीं पड़ेगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सिफारिश की गई थी कि देश में एक साथ चुनाव कराए जाने चाहिए।

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